Wednesday, August 15, 2012

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा । हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा ।।




 सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा ।
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा ।।

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में ।
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा ।। सारे...

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का ।
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा ।। सारे...

गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ ।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा ।।सारे....

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको ।
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा ।। सारे...

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना ।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा ।। सारे...

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से ।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा ।।सारे...

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी ।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा ।। सारे...

'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में ।
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा ।। सारे...
जय हिन्द 

No comments:

Post a Comment